ये महज़ ज़मीन नहीं
ये हमारे बुज़ुर्गों की आख़िरी आरामगाह है, और एक दिन हम सबको भी यहीं आना है। ये ज़मीन हमेशा मुसलमानों की रही है, और हमेशा रहेगी।
अब तक क्या हुआ
290 मीटर दीवार बन चुकी है सिर्फ़ 100 मीटर बाक़ी
अलहमदुलिल्लाह, आप सबकी मदद से चारदीवारी का ज़्यादातर काम हो चुका है।
क़ानूनी लड़ाई भी आगे बढ़ रही है: हमारी शिकायत पर कार्रवाई के हुक्म हुए हैं, और हाई कोर्ट में रिट दायर हो चुकी है।
आपका ₹100 कहाँ लगता है
- बाक़ी दीवार100 मीटर बाउंड्री, और बनी दीवार का क़र्ज़
- सफ़ाई और देखभालमरम्मत और रोज़ की देखरेख
- पैरवीहाई कोर्ट में वकीलों की फ़ीस
500साथी
×₹100हर महीने
=₹50,000हर महीने
हर पैसे का हिसाब
पूरा हिसाब ग्रुप में दिया जाता रहता है। ऑनलाइन आए हर दान का रिकॉर्ड वक़्फ़ के खाते में रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ऑटोपे को बंद कैसे करें?
अपने UPI ऐप (GPay, PhonePe, Paytm) में “AutoPay / Mandates” में जाकर कभी भी रोक या बंद कर सकते हैं। अगले महीने से पैसा नहीं कटेगा।
₹100 से कम क्यों नहीं?
हर महीने की पक्की रक़म से ही दीवार, देखभाल और पैरवी का ख़र्च चलता है। ज़्यादा देना चाहें तो अपनी हैसियत से ज़्यादा भी दे सकते हैं।
पैसा किसके खाते में जाता है?
हर महीने वाला ऑटोपे सीधे “वक़्फ़ कब्रिस्तान संख्या 858” के बैंक खाते में जाता है, जो उ.प्र. सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड में दर्ज वक़्फ़ है और जिसका प्रबंध समिति करती है। “एक बार” वाला QR, क़ब्रिस्तान के दान के लिए रखे UPI खाते में जाता है।
क्या इस पर टैक्स छूट (80G) मिलेगी?
नहीं। ये वक़्फ़ का खाता है, इस दान पर आयकर की 80G छूट नहीं मिलती।
क्या विदेश से दे सकते हैं?
अभी नहीं। सिर्फ़ भारतीय UPI और भारतीय कार्ड से दान लिया जाता है।
ये हमारे बुज़ुर्गों की अमानत है। आइए, मिलकर इसे महफ़ूज़ रखें।
